Friday, November 14, 2008

कुछ नहीं

फूल खिलते नहीं यूंही अब मेरे दामन में

की लग चुकी हैं आग एक बार इस चमन में

वो क्या सींचेगे प्यार की इस बगिया को

जो तोड़ लेते हैं अलसुबह फूलों को.

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