Tuesday, October 7, 2008

ना ज़मी ना चाँद .....

ना ज़मी ना सितारे ना चाँद चाहिए
बस सांवली सी एक लड़की मासुमी के साथ चाहिए
ना दुआ ना खुदा ना हाथ में तलवार चाह्हिये
मुसीबतों में बस हाथो में हाथ चाहिए
चोट लगे मुझे आंसू आँखों में उसके चाहिए
एक म्रदुल कोमल सा अहसास चिह्ये
कहूं न मैं तो समझ जाए बहुत कुछ
दिल में उसके मेरे ही जज्बात चाहिये
लड़ लूँगा अकेला मैं हर तूफ़ान से
बस साहिल पर उसका दुओं से उठा हाथ चाहिए
जिंदगी उलझ गई है मझधार में
आजा की तेरे प्यार की पतवार चाहिए
ना ज़मी ना सितारे ....................

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