Thursday, December 4, 2008

JHOLA-CHHAP: व्यंग्य

JHOLA-CHHAP: व्यंग्य

व्यंग्य

कुत्तों की पब्लिसिटी

Wednesday, December 3, 2008

जिंदगी

दर्द को ख़ुशी में छुपा लेते हें
जब आती है याद तो खिल-खिला लेते है.

Tuesday, December 2, 2008

Aaj ka SMS


Likhu Kuch Aaj Yeh Waqt Ka Takaza Hai

Mere Dil Mein Dard Abhi Taaza Hai

Gir Padte Hai Ashk Mere Kagaz Par

Kalam Me Syahi Kam Aur Aansoo Jyada Hai

Thursday, November 27, 2008

गम-ऐ-जिंदगी

उनके दानिश-ए-हयात पर हम फ़ना हो गए,
फिल-हकीकत-ए-करम से जां-बलम हो गए।
वो समझे हम रुखसार-ए- हुस्न पर मर गए,
अब कौन समझाये उन्हें, वो क्या गुनाह कर गए।
ये दिल-ए-"अधूरा" हैं, इश्क-ए-अरमान मर गए,
हम समझते थे उन्हें संजीदा, वो रंग-ए-वफादार हो गए।
जौहर-ए-नगीने के पारखी जौहरी हो गए,
गुमान-ए-हुस्न सबाब, अब फौरी हो गए।
नांजा झूठे हुस्न-ओ-लुआब तुम्हारे चले गए,
और आई साथ निभाने की बारी तो आशिक-ए-हुजूम बिखर गए।

शेरगुल्ला

महबूब की मोहब्बत में "अधूरा" क्या से क्या हो गया,
निकला था घर से हट्टा-कट्टा, लौटा तो उल्लू का पट्ठा हो गया।

फ़ना

नाजा हूँ तेरे इश्क-ए-रुसवाई से
मैंने तो खुलूस-ए-हयात से की अकीदत
फ़ना होता हूँ तेरी दानिश-ए-रिवायत से
जो दी तुने तबियत-ए- दिल से अजीयत।

Wednesday, November 19, 2008



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Friday, November 14, 2008

वो अपना है या बेगाना???


वो अपना है या बेगाना, अच्छा लगता है ।
दो पल उसके साथ बिताना अच्छा लगता है ।
रोज बहाने कर के जाना अच्छा लगता है ।
एक झलक भी उसकी पाना अच्छा लगता है ।
उसकी बात अलग है वो मुझको कुछ भी कह ले ,
आशिक, पागल या दीवाना अच्छा लगता है ।
कहने को तो जब मैं चाहू वो हाँ कह देंगे,
लेकिन उनका कहना ना-ना अच्छा लगता है,
रिश्ता क्या है उससे मेरा,
ख्वाबों में भी उसका आना अच्छा लगता है ।
और क्या लिखूं उसके बारे में,
उसकी हर बात अच्छी लगती हैं,
कौन बताये उसे सचमुच वो मुझे इतनी अच्छी लगती है .

कुछ नहीं

फूल खिलते नहीं यूंही अब मेरे दामन में

की लग चुकी हैं आग एक बार इस चमन में

वो क्या सींचेगे प्यार की इस बगिया को

जो तोड़ लेते हैं अलसुबह फूलों को.

उनके लिए

जानते हैं दुनिया के रिवाजों को
पहचानते है उनके इरादों को ।
अनजाने बने रहते है दिखाने को
हम तो हँसते ही हैं उनको हँसानें को ।

चाहत

थी हमारे प्यार में कोई कमी
या नसीब ही खोटा था ।
हमने चाहा था उनके दिल में रहना
पर शायद वो घर ही छोटा था ।

Tuesday, October 7, 2008

Mushkilo se ghabra ke ab jeena nahi chahte,
Dur tumse hoke ab rahna nahi chahte,
Yun to dost bahot bane is zindagi mein,
Par tuz jaise dost ko khona nahi chahte

ना ज़मी ना चाँद .....

ना ज़मी ना सितारे ना चाँद चाहिए
बस सांवली सी एक लड़की मासुमी के साथ चाहिए
ना दुआ ना खुदा ना हाथ में तलवार चाह्हिये
मुसीबतों में बस हाथो में हाथ चाहिए
चोट लगे मुझे आंसू आँखों में उसके चाहिए
एक म्रदुल कोमल सा अहसास चिह्ये
कहूं न मैं तो समझ जाए बहुत कुछ
दिल में उसके मेरे ही जज्बात चाहिये
लड़ लूँगा अकेला मैं हर तूफ़ान से
बस साहिल पर उसका दुओं से उठा हाथ चाहिए
जिंदगी उलझ गई है मझधार में
आजा की तेरे प्यार की पतवार चाहिए
ना ज़मी ना सितारे ....................

Friday, September 5, 2008

कब तक छुपाये इस तड़प को


कब तक छुपाये इस तड़प को

सामने न हो तो चैन आता नही

और सामने हो तो कुछ याद रहता नही

क्या वो इतने अनजाने हैं

या फिर हम इतने दीवाने कि

उनके सिवा कुछ भाता नही

और उन्हें ये पता ही नही ।


Monday, August 4, 2008

क्या करे

क्या करे जब बात बिगड़ जाए
क्या करे जब कोई बिछड़ जाए
हम तो बात बनाना चाहते है
हम तो उन्हे पाना चाहते है

Sunday, August 3, 2008

Socha Na Tha

Socha Na Tha
Aisa Bhi Honga

Jab Hum Royenge
Ye Duniya Aur Rulayengi

Jab Thamege Daman Unka
Wo Daman Bachayenge

Socha Na Tha..........

Jab Yaad Karenge Unko
Wo Samne Se Gujar Jayenge

Palkon Me Sajayenge Unko
Aur Wo Aankhon Me Nastar Chalayenge

Socha Na Tha..........

Aisa Ho

Jab Likhta Hun To
Syahi Khatam Ho Jaati Hai

Jab Sota Hun To
Neend Chali Jati Hai

Jab Chalta Hun To
Rahe Khatam Ho Jati Hai

Kash Aisa Ho Tanhai Maangu To
Viraniya Khatam Ho Jaye

Main Rahun Pareshan To
Tum Kush Nazar Aao.

Jo Likha So Sahi

Jab Hawa Chalti Hai
To Chalti Hi Chalti Hai

Jab Badal Udte Hai
To Udte Hi Udte Hai

Jab Barish Hoti Hai
To Hoti Hi Hoti Hai

Aur Jab Hum Likhte Hai
To Aap Padte Hi Padte Hai.