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Friday, November 14, 2008
उनके लिए
जानते हैं दुनिया के रिवाजों को
पहचानते है उनके इरादों को ।
अनजाने बने रहते है दिखाने को
हम तो हँसते ही हैं उनको हँसानें को ।
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